लकवा में कौन सा इंजेक्शन लगता है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 13:20


इंजेक्शन से आसान हुआ लकवा का इलाज

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : विश्व की नवीनतम तकनीक थ्रबोलाइसिस (इंजेक्शन विधि) से शहर के मेट्रो अस्पताल में लकवे का इलाज शुरू किया गया है। अब तक किए गए 100 से अधिक मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है।

अस्पताल के न्यूरोलोजी विभाग के एचओडी व सीनियर कंसलटेंट न्यूरोलाजिस्ट डा.रोहित गुप्ता ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि थ्रंबोलाइसिस इंजेक्शन आटरी में थक्के को घोल देता है, और मस्तिष्क की धमनी में रक्त प्रभाव पुन: सामान्य हो जाता है व लकवा ग्रस्त मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसके लिये उम्र की कोई सीमा नहीं है।

उन्होंने बताया कि तीव्र स्ट्रोक या लकवाग्रस्त किसी भी उम्र में हो सकता है। यह 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी हो जाता है। भारत में तीव्र स्ट्रोक/लकवा से 10 से 15 प्रतिशत मरीज 40 से कम उम्र के होते हैं। थ्रबोंलाइसिस तकनीक 18 साल से ऊपर के किसी भी मरीज पर की जा सकती है। इस तकनीक के इस्तेमाल से युवा मरीजों पर इसके रिजल्ट बहुत ही अच्छे हैं। थ्रंबोलाइसिस की यह तकनीक लकवा होने के साढ़े चार घटे तक की जा सकती है। तीव्र स्ट्रोक/लकवाग्रस्त मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंच जाना चाहिए, क्योंकि जल्दी से उपचार मिलने पर इसके परिणामों की प्राप्ति 100 प्रतिशत तक हो सकती है।

डा. गुप्ता ने कहा कि थ्रंबोलाइसिस चिकित्सा के उपयोग व जागरूकता पर जोर देने की जरूरत है। विंडो पीरियड का महत्व, थ्रंबोलाइसिस चिकित्सा का लाभ, स्ट्रोक के लक्षण के बारे में जानकारी होनी चाहिए। हमने 24 साल से लेकर 86 साल तक के पैरालाइसिस के मरीजों को थ्रंबोलाइसिस तकनीक द्वारा ठीक किया है।

इस मौके पर प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एस.एस. बंसल ने कहा कि मेट्रो अस्पताल में थ्रंबोलाइसिस (इन्जेक्शन विधि) चिकित्सा होने से कई मरीजों को इसका लाभ मिला है और कई गंभीर स्ट्रोक/पैरालाइसिस के मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं।

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